इस पुरातत्व महत्व के अति प्राचीन मंदिर में गर्भवती महिलाओं का प्रवेश निषेध है. मंदिर के न्यासी मधुकर सातपुते जी ने कारण पूछने पर बताया कि अंचल में लोकमान्यता है कि गर्भवती महिलाओं की दृष्टि से देवालय में प्रतिष्ठापित नागदेवता अंधे हो जायेंगे.
गोड़ आदिवासी नागवंशीय राजाराओं द्वारा निर्मित श्री भद्रनाग स्वामी देवस्थानम मंदिर ब्रह्मावती महाराष्ट्र में अवस्थित है. नागों में सर्वश्रेष्ठ शेषनाग का यह मंदिर है परिसर में रखे शिलालेख के अनुसार इसके सभामंढप का जीर्णोद्धार दो हजार साल पहले किया गया था.
संपूर्ण विश्व में यहां एक मात्र नौ फन वाले नागदेवता हैं की प्रतिमा है. यहां भक्तवृंद दुग्धयुक्त सिंधुर चढ़ाते हैं. मधुकरजी ने बताया कि सन् १९८० में प्रतिमा से १७ बोरा सिंधुर का कवच निकला तो लोगों को पता चला यह तो ९ फनों वाला नाग है.
विदर्भ अंचल के लोगों में इस मंदिर के प्रति अगाध आस्था और श्रद्धा है. देवस्थान के न्यासी सातपुते जी के अनुसार अनेकों लोगों को नागदेवता ने दर्शन दिये हैं.
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