आऊटिंग में रामकथा का जलप्रपात
कोरबा के दूरस्थ वनवासी अंचल देवपहरी में सहपरिवर चलने का मित्र ने फोन पर न्योता दिया मैंने सहर्ष सहमति दे दी। दरअसल मित्र के गुरूजी आचार्य श्री धर्मेन्द्र जी महाराज की वहाँ रामकथा चल रही है। मै अवाक् रह गया विश्व हिन्दू परिषद के केन्द्रीय मार्गदर्शक और फायर बांड नेता पहुँच विहीन आदिवासी इलाके में कथा वाचन कर रहें हैं!
बकौल बनवारी लाल अग्रवाल पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष के आचार्य जी ने स्वयं यहाँ राम कथा बांचने की इच्छा जाहिर की थी। दरअसल प्रदेश के मुख्यमंत्री जी के साथ वे पिछले दफ़े गोमुख आश्रम में गोशाला के उद्घाटन के सिलसिले में हेलीकाप्टर से आये थे तब यहाँ की प्राकृतिक सुषमा वन क्षेत्र कलकल का निनाद करती सरिता और जलप्रपात देखकर मंत्रमुग्ध हो गये एवम इस अरण्य में राम कथा वाचन का निश्चय किया।
बहरहाल हम सभी नियत स्थान पर एकत्रित हो कर कोरबा जिला अंतर्गत लेमरू वन क्षेत्र के लिए प्रस्थित हुए। बालको से देव पहरी लगभग 50 किलोमीटर है। बालको नगर से निकलते ही वन प्रान्तर की अनुपम छटा दिखने लगी। पहाड़ों को काट कर सड़कें बनायी गयीं है। दोनों और साल के दरख़्त। सघन वन क्षेत्र सूरज की रोशनी भी बहुत कम पहुंच पाती है इस वनांचल में। पहाड़ी रास्तों को चीरते हमारी गाड़ी ताबड़-तोड़ सतरेंगा पहुंचती है।
सतरेंगा में वन विभाग के बोर्ड ने सहसा हम लोगों का ध्यान खिंचा। इस वन ग्राम में देश का सबसे ऊँचा साल का व्रिक्ष है जिसे महा साल कहा जाता है यह क्षेत्र का अजूबा पेड़ है, साथ ही बांगो परियोजना के बांध का यहाँ अंतिम हिस्सा है। सूर्य की रश्मियों में बांध के पानी की सतह दर्पण की तरह चमक रही थी। यहाँ कुदरत को अपलक निहारने के बाद हम देव पहरी के लिए कूंच किये।
हमें महसूस होने लगा की जिस प्रयोजन से हम इतनी दूर आये हैं उससे वंचित न हो जाएँ। गाड़ी की खिड़की का शीशा खोल दिया गया था। तीन बजने को है। आचार्य जी की राम कथा का समय बीता जा रहा है और भूख भी सताने लगी क्या किया जाय मित्रों? तब दुसरे साथी ने कहा- भूखे पेट भजन, होय न गोपाला !! , बोझिलता हटीं हास्य ने हम सबको हलका किया कि बस जल प्रपात की अनुगूँज ने हमें चौकन्ना किया बस भैया यहीं रुका जाये और क्षुदा शांत की जाय।
साथ में लाई गयी चादर चट्टान पर बिछाई गई टिफिन खोला गया और सुस्वादु व्यंजन सज गये। यह स्थल वन ग्राम देव पहरी का सबसे रमणीक केंद्र है जिसे वन विभाग ने पिकनिक स्पॉट के रूप में विकसित किया हुआ है यह है गोविन्द झुंझ जलप्रपात चोरनई नदी का किनारा। एक और हरीभरी पर्वत मालाये तो दूसरी और सफेद चट्टानों के ऊपर कलकल का निनाद करती नदी की उद्दात्त जलधारा प्रकृति के मनोहारी दृश्य को देखते उठने का दिल नहीं कर रहा था। घड़ी को देख मित्र ने कहा अरे! चलो यार टाइम हो गया।
आखिर हम पहुंच गये हिंदुत्व के ध्वजावाहक आचार्य श्री धर्मेन्द्र जी महाराज के कथा स्थल पर। दिव्य स्वरूप आकर्षक व्यक्तित्व के धनी आचार्यजी के सम्मुख हम अब रामकथा के जल प्रपात से अभिसिंचित होने लगे। आचार्यजी को सुनना माने समकालीन देशकाल वातावरण की सजीव यात्रा करना है। कथा भावपूर्ण और जीवंत मीमांसा। आरती कथा विश्राम हम सभी महराज जी से मिलने गोमुखी सेवा धाम परिसर स्थित कुटिया में चले गये। आओ!! आचार्यजी ने वात्सल्य पूर्वक कहा- अरे इतनी दूर चल कर आये हो? मै तो स्वयं पांच को बनारी आ रहा हूँ...फिर मुस्कुराते हुए कहा चलो इस बहाने आउटिंग हो गयी। हम भी मुस्कुरा रहे थे। हम तो रामकथा के बहाने आउटिंग पर थे.....ये है शब्दार्थों का जल प्रपात।