Friday, August 22, 2014

त्र्यम्बकेश्वर यात्रा

त्रयंबकेश्वर य।त्रा

                      निकले तो बूंदाबांदी का मौसम था.... घाट की चढ़ाई शुरु होते ही प्रक्रति अपना रंग बिखेरने लगी।  वैसे भी हम मैदानी लोगों को जंगल, पहाड़, झरने और झाड़-झंखाड़ बहुत आकर्षित करतें हैं।  ज्यों-ज्यों हम ऊंचाई पर पहुंचने लगे तो मौसम भी करवट लेने लगा।  पेड़ की डगांले झूलने लगी और ब्रह्मगिरी पर्वत पर अब बादल खिलने लगे।  दिन के साढ़े दस बजे हैं सुबह का उजास मद्धम होने लगा।  ये लो बारिश शुरु हो गई पर्वतमालाओं पर खिले श्याम मेघ झमाझम बरसने लगे।  बादलों कें अंधेरे खोह से जब गुजरना मुश्किल हुआ तो हमने गरम चाय का आनन्द लेने गाड़ी रोक ली।

                      मौसम सामान्य होने पर हम पुन: निकल गये महर्षि गौतम की तपोभूमि त्रयंबकेश्वर की ओर।  पवित्र गोदावरी कुण्ड के पास अवस्थित ज्योतिर्लिंग त्रयंबकेश्वरजी के देवालय परिसर पर पहुंचे तो विशाल जन सैलाब कमोबेश ऐसी भीड़ तो सावन के महिने में ही आमतौर पर उमड़ती है, जबकि अब तो भादौ मास लग चुका है।  पंडितजी ने जिग्यासा शांत कि मराठी पंचांग के अनुसार हम पन्द्रह दिन पीछे चलतें हैं।  कालसर्प योग की शांतिपूजा के लिये पूरे देश और परदेश से भगत त्रयंबकेश्वर की ही शरण में आते हैं। हां एक और खासियत यहां की यह है कि ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों देंव एक साथ विराजे हुए हैं इसलिये मंदिर के गर्भग्रिह में स्त्रीयों का प्रवेश निषेध है।




3 comments:

  1. Waah papa ...aaj maine phir ghar baithe shri Trayambkeshwar ji ke darshan kie..Eagerly waiting for your next post .....Har Har Mahadev...

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    1. बहुत बहुत धन्यवाद्

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