Sunday, August 24, 2014

डबल डेकर और पीहर की महक.....

खूब भ्रमण हो गया मुंबई का .....अब चलें बड़ोदा।  बोरीवली स्टेसन पर इतजार है मुंबई से अहमदाबाद जाने वाली डबलडेकर ट्रेन का।  साढ़े चार घटे का सफ़र है। भागता-दौड़ता महानगर है मुंबई, लोग लोकल ट्रेन से उतर-चढ़ रहें हैं, एक प्लेटफार्म से दूसरे प्लेटफार्म भीड़ और भीड़।  किसी को सांस लेने का टाईम नहीं हैं। बड़ोदा हम रात्रि 7:30 बजे पहुँच जायेंगे। प्लेट्फार्म नंबर 4 पर सी/8 का स्टेटस् बताने के कुछ देर बाद ही ट्रेन आ गयी।  वाह! डबल डेकर के ऊपरी फ्लोर पर हमारी सीट रिज़र्व हुई है।  

और शुरू हुआ रोमांचक सफर।  बहुत आरामदायक यात्रा महसूस हो रही है।  केटरर ने आवाज लगानी शुरू की अमूल कुल ...कूल-कूल।  गुजरातियों की प्रिय ट्रेन हो गयी है यह जबकि पिछले साल ही इसका परिचलन शुरू हुआ है।  भोगौलिक और सांस्कृतिक, आर्थिक रूप से गहरा रिश्ता है गुजरात-मुंबई का।  सही अर्थों में कहा जाये तो मुंबई की आर्थिक बुनियाद गुजरातियों ने ही रखी है।  फुल एसी ट्रेन मैं फुल एंटरटेनमेंट है गुजराती में हास परिहास चल रहा है।  ऐसा महसूस हो रहा है ज्यों मैं लोकप्रिय टीवी सिरियल तारक मेहता का उल्टा चश्मा देख रहा हूँ।  कोई वाट्स एप्प पर चैटिंग में तो कोई फेसबुक पर बिजी है । वो आग्रह कर रही है- दरिया नुं फोटु खिंचो न! मोटा भाई, और १२ मेगापिक्सल के नये स्मार्ट कैमरे से मोटा भाई ट्रेन की खिड़की से दरिया  की सटासट फोटो खिंचने में मगन है।  

६३ हजार करोड़ की बुलेट ट्रेन मुबई-अहमदाबाद इसी रुट पर, चलाने संसद ने बजट पास कर दिया है।  जब चलेगी भाई साब तब चलेगी फिलहाल हम तो जीवन में पहली बार डबल डेकर ट्रेन का आनन्द भरुच का सिंगदाना खाते हुए उठा रहें हैं। मेरी भाग्यवान मुग्ध है पीहर की महक से। फिर खिलखिलाने लगी बगल के जोड़े की गुजराती में बात सुनकर। मैने पूछा क्या हुआ? जवाब मिला नईनवेली बोल रही है चिमनभाई तुम खाखरा पानी का डिब्बा बंद करो वरना बरोड़ा की जगह आणद पहुंच जाओगे.....अरे चलो किनारे बरोड़ा आने को है। मेरी बिटिया ने कहा मामाजी की नैनो स्टार्ट नहीं हुई।  हां-हां कोई बात नहीं नीतु, हम टेक्सी से घर चले जायेंगे। लो हो गया डबल डेकर का सुहाना सफर पूरा।

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